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छोटे सम्राट

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  मित्रों यह सम्राट कहानी की अगली कड़ी है , जो  आप में से ही कुछ मित्रों की माँग वो सलाह से प्रेरित है । आप ने पिछले भाग में सम्राट और उसके अतिमहत्वाकांक्षी दुर्बुद्धि का परिणाम देखा , परन्तु अब भी बहुत कुछ शेष था।                                 सम्राट का शावक, जिसे जानवर छोटा सम्राट कहते थे परन्तु  प्यार से नहीं डर तथा नफरत से। जंगल लगभग बरबाद हो चुका था, परन्तु शावक के जीवन का लम्बा सफर अब भी शेष था। जिसे जीने के बहुत से तरीके थे जैसे- हाल पर जिंदा रहना, परिस्थितियों को दोष देना या फिर सम्राट को कोसना। ये सब आसान प्रतीत होते हैं परन्तु शावक को घुट घुट कर जीना स्वीकार नहीं था, पर करे तो क्या? सिंह की संतान को आत्महत्या भी तो शोभा नहीं देता।                               शावक कुछ दिनों तक भूखे रहने के बाद दूसरे जंगल का रुख करता है, परन्तु सदा के लिए नहीं अपितु पेट भरने के लिए , शिकार तो आवश्यक था जीवन के लिए परन्तु अब ...

कृष्ण और कामना

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कृष्ण को चाह है यूं तो बृजधाम की। द्वारिका सत्य है किंतु घनश्याम की।। धार यमुना की मन में ही बहती रहे गोते सागर की लहरों में लेना ही है जिंदगी चलती है अपने ही ढंग से वो तो होता ही है जिसको होना ही है पीर पर भारी मुस्कान है श्याम की। कृष्ण को चाह है यूं तो बृजधाम की।। यूं तो दुनिया ही पलकें बिछाए मिली एक राधा ही मन को लुभाती उन्हें उनका जीवन अधूरी कहानी रहा दुनिया अवतार पूरा बताती उन्हें कृष्ण गाथा समर्पण की बलिदान की। कृष्ण को चाह है यूं तो बृजधाम की।। थाम  वंशी  बनें  प्रेम  के  देवता शांति का ले निवेदन तो जाना ही है नीति मजबूरियों की गुलामी नहीं शांति को युद्ध भारी रचाना ही है कृष्ण  का अर्थ  है  कर्म  निष्काम  ही । कृष्ण को चाह है यूं तो बृजधाम की।।   जो समय ने कहा पूरे मन से किया ये भी मालूम है सारा खो जायेगा द्वारिका स्वर्णनगरी प्रभु ने किया है पता कि ये सागर का हो जायेगा कृष्ण ही सार है श्रृष्टि अविराम की| कृष्ण को चाह है यूं तो बृजधाम की।।

नज़रें

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दिल का क्या है दिल का क्या है वह तो कभी भी भर जाता है और गढ़ता रहता है कुछ नया तुम भी मैं भी और हम दोनों और और कुछ भी नहीं जैसे कुछ हो ही नहीं निकट भविष्य में पर  मैं ग़लत था वहां सब कुछ है बस देखना था तुम्हारी नज़रों को मेरी नज़रों से, तुम्हारी नज़रों में और दिख जाते  हम अढ़ाई  वह... जो होना चाहिए जो होता है सब कुछ शाश्वत है नश्वर हैं तो मेरी नजरें जो देख नहीं पाती तुम्हारी नज़रों में।

विजय के बाद

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  क्षितिज के पार से है आ रहा संदेश कोई| कि जैसे हो धरा पर आ रहा परिवेश कोई| उतर जगती पे स्वर्णिम काल करना चहता है,  करूँ सहयोग उसका ला रहा आदेश कोई||                          छिपा आदेश में ही मुक्ति निज का मार्ग भी है|                         जगत के वास्ते उसमें छिपा सन्मार्ग भी है|                         विजय के बाद की दुनिया लुभाती है अभी से,                           दिशा देने को माधव का बताया मार्ग भी है|| नहीं मैं कह रहा हर व्यक्ति पूरण संत होगा| मगर यह है सुनिश्चित दीनता का अंत होगा| नहीं देवत्व की अनुभूति की आकांक्षा है,  भरा गुणधर्म मानव का मगर अत्यंत होगा||                      वहाँ हर व्यक्ति को व्यक्तित्व निज का बोध होगा|          ...

मुस्कुराना चाहता हूँ

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मैं देंह छोड़ डायरी में आना चाहता हूँ| तेरे साथ में मुस्कुराना चाहता हूँ|| मौन हूँ कुछ कह नहीं पाता जज्बात तुझसे बताना चाहता हूँ मैं देंह छोड़ डायरी में आना चाहता हूँ।। खुलीं आँख ख्वाबों में तुम आ रहे हो बैठे  मेरे  पास  मुस्का  रहे हो मेरे ख्वाब कैसे बताऊँ मैं तुझसे ख्वाबो में तेरे समाना चाहता हूँ मैं देंह छोड़ डायरी में आना चाहता हूँ।। मैं कह न पाता या तुम सुन न पाते या फिर हो जज्बात हमसे छुपाते नयनों की भाषा से अनजान हूँ मैं लेकिन उसी में समाना चाहता हूँ मैं देंह छोड़ डायरी में आना चाहता हूँ।। लिखकर ही मन की व्यथा रोकता हूँ जुवां पर न आ जाये,ये सोचता हूँ क्यों और कैसे नहीं मुझको मालूम पर तेरी खुशियाँ कमाना चाहता हूँ मैं देंह छोड़ डायरी में आना चाहता हूँ| तेरे साथ में मुस्कुराना चाहता हूँ||

सम्राट

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एक बार की बात बात है।एक जंगल में एक बब्बर शेर समस्त जंगली जीवों पर कुशलता पूर्वक राज्य करता था,उसके राज्य में सब प्रसन्न थे।सभी जीवधारी अपने राजा की तरह सुव्यवस्थित जीवन जीने को प्रयासरत थे। वहाँ कोई भी जरूरत से ज्यादा हड़पने पर विश्वास नहीं करता था। फलस्वरूप मौसम व प्रकृति भी लोगों के अनुकूल थी।                     एक दिन जंगल के राजा बब्बर शेर को एक पुत्र हुआ। सभी जंगली जीवों ने अपने नए राजकुमार के आगमन का उत्सव मनाया और प्यार से उसे सम्राट नाम दिया। सम्राट शरीर से अत्यंत खूबसूरत और बुद्धिमान प्रतीत होता था।                      समयानुसार वह बड़ा और बलवान होने लगा। परन्तु इन सबके साथ साथ उसमें बढ़ रहा था घमण्ड, उसके ज्ञान व बल का| उसे अपने पिता की नीतियाँ कठिन एवं बकवास प्रतीत होती थी। उसे लगता था उसके पिता व्यर्थ ही लोगों के लिए श्रम करते हैं और उन्हें सुरक्षित रखने का प्रयास करते हैं।उन्हें जंगल की खुशियों से क्या मतलब जबकि वह बिना किसी प्रयत्न के मौज कर सकते हैं,वे राजा तो अपने ब...

हे कृष्ण

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हे कृष्ण दया करना हमको,              मंथन की विधि बता दो खुद  को मथ मन माखन करलें,           प्रभु आकर इसे चुरा लो|| प्रभु आप चुरा लो इसको तो,            आनंदित हो क्रीड़ाओं से यदि तुममें ही ये रमा रहे,           तो बच जाये पीड़ाओं से गीता का ज्ञान नहीं मुझको,           फिर भी एक गीत बना लो खुद  को मथ मन माखन करलें,           प्रभु आकर इसे चुरा लो।। तुम मनमोहन कहलाते हो,       मन मोहित करके दिखलाओ ये माया झूठी है या सही,              प्रभु ज्ञान नहीं अब बतलओ  सेवा का धर्म नहीं मालूम,         फिर भी निज दास बना लो खुद  को मथ मन माखन करलें,           प्रभु आकर इसे चुरा लो।। नैनों में अब तो बस जाओ,           नैनों में बात करें हम तुम कानों में वंशी मधुर मधुर,        अधरों...